पर्वतीय क्षेत्रों में कई दिनों से धधक रहे जंगल, विभाग कह रहे संसाधन नही और नेता बैठे हैं खामोश। यूँही थोड़ी पिछड़ रहा है राज्य, पर जवाब दे कौन ?


उत्तराखंड आजकल दो बातों को लेकर सुर्खियों में है। जंगलों में लगी आग और गांव-गुठारों में बाघ। जंगल धूं-धूं कर जल रहे हैं और राज्य के होनहार नेता और वन विभाग के आला अधिकारी देहरादून में AC में बैठे हुए हैं। कुछ दिन पहले खबरें थी कि वायु सेना की मदद ली जाएगी लेकिन लगता है बयान भी जहाजों की तरह हवा में उड़के वापस ठिकाने पर बैठ गए हैं। इधर क्या गढ़वाल और क्या कुमाऊँ, आग से जंगल और जंगली जानवर बेहाल हैं। आजकल लैंसडौन वन प्रभाग के जंगल धू-धू कर जल रहे हैं। तो कुमाऊँ अल्मोड़ा में मैग्नेसाइट झिरौली की तरफ जंगल से आई आग से दो गोदाम जलकर खाक हो गए हैं।

आपको बता दें कि लैंसडौन व दुगड्डा रेंजों में पिछले दस दिनों में कई जंगल आग की चपेट में आकर राख हो गए हैं। लैंसडौन रेंज की बाडियूं, बरस्वार, भानकोट, चैलूसैण, द्वारीखाल, गढ़खोला, कूरा व सिलोगी बीटों में जंगल की आग से जंगल का बड़ा क्षेत्र प्रभावित हुआ है।  प्रभागीय प्रभारी वनाधिकारी अमरेश कुमार ने बताया कि वन कर्मी लगातार क्षेत्र में फायर वाचरों के साथ मिलकर जंगलों में लगी आग को बुझाने में जुटे हुए हैं। उनका कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार कर्मी आग बुझाने में जुटे हुए हैं। हालांकि आये साल जंगलों में आग लगती है और विभाग के पास कभी भी संसाधन पूरे होने की पुष्टि नही होती है। इसलिए यही बात आप अगले साल भी पढ़े या सुने तो चौंकिएगा मत।

इधर, अल्मोड़ा बुधवार को नैणी, झिरौली के जंगल जल रहे थे। एकाएक आग पालड़छीना की तरफ बने मैग्नेसाइट के गोदाम तक पहुंच गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। जिससे दो गोदाम जलकर पूरी तरह खाक हो गए हैं। गोदाम में पुराना फर्नीचर, जीआइ पाइप, रबर के पाइप, कबाड़ समेत अन्य सामान रखा गया था। इसके अलावा टिन सेड होने से गोदाम की छत की लकड़ी की बल्लियां और तख्ते भी जल गए हैं। 

प्रकाशन तिथि: अप्रैल 20,2022