राष्ट्रपति पद के विपक्षी चेहरे यशवंत सिन्हा की पत्नी को नही जितने की आश, जाने क्या बोले यशवंत सिन्हा अपनी हार को लेकर।

 
यशवंत सिन्हा पहचान की राजनीति में पिछड़ते दिख रहे हैं। यशवंत सिन्हा की जीत पर उनकी पत्नी नीलिमा सिन्हा को भी भरोसा नहीं है। उन्होंने मीडिया से कहा कि मेरे पति को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए जाने से खुशी तो है लेकिन मुश्किल भी है। उन्होंने कहा कि मेरे पति साफ बोलने वाले लोगों में से हैं। उन्हें जो ठीक लगता है वहीं करते हैं। उनका कैरेक्टर मजबूत है। उनके पास उनका आत्मविश्वास है। वो गलत कामों को वो बर्दाश्त नहीं करते हैं। अपने पति की जीत पर नीलिमा सिन्हा ने कहा कि उम्मीद तो कोई खास नहीं है क्योंकि जानते हैं मेजोरिटी तो बीजेपी के साथ है। कैंडिडेट भी उन्होंने बहुत अच्छा चुना है। इसलिए मुझे कुछ खास उम्मीद नहीं है लेकिन खैर फिर भी.......देखते हैं क्या होता है।

पहचान की राजनीति (Identity Politics) को राष्ट्रपति के तौर पर द्रौपदी मुर्मू की जीत धार देगी। काफी लंबे समय से बीजेपी इस पर होमवर्क कर रही थी। नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी वाली बीजेपी ऐसी आइडेंटिटी पॉलिटिक्स को खास तवज्जो दे रही है। राष्ट्रपति भवन में एक आदिवासी महिला के होने का असर पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड जैसे पूर्वी भारतीय राज्यों में दिखेगा। द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी पर यशवंत सिन्हा ने एबीपी से कहा कि 'पूरी मानवता का ये चॉइस नहीं होता है कि हम कहां पैदा होंगे। आप कहीं पैदा हुए, मैं कहीं पैदा हुआ।

अपनी पत्नी की रिएक्शन पर यशवंत सिन्हा ने कहा कि हमारे परिवार में हर कोई स्वतंत्र मिजाज का है और अपने हिसाब से काम करते हैं। जिसकी आज सबसे ज्यादा जरूरत है। ऐसी बात नहीं कि यशवंत सिन्हा ने रिजल्ट को लेकर मंथन नहीं किया होगा। उनको भी इस बात का पूरा अहसास होगा कि लड़ाई टफ है और हार पक्की दिख रही है। मगर वो मैदान से हटने के मूड में बिल्कुल नहीं है। उनको अदृश्य शक्तियों पर भरोसा है। उनको लगता है कि द्रौपदी मुर्मू एक रबर स्टाम्प राष्ट्रपति साबित होंगी। इसलिए देश के सांसद और विधायक उनको राष्ट्रपति चुनेंगे। खेला होने की भी यशवंत सिन्हा को पूरी उम्मीद है।