मसूरी उत्तराखंड पर्यटन स्थल (mussoorie Tourist Place)


देहरादून से मात्र 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित, मसूरी उन स्थानों में से एक है जहाॅं लोग एक बार आकर फिर बार-बार आना चाहते है । इसकी दो प्रमुख वजह है- एक तो यह देहरादून के पास है और दूसरा प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। शहरी पर्यटकों के लिए कम खर्चे पर पर्यटन का सबसे अच्छा समाधान है मसूरी । मसूरी का इतिहास सन 1825 में कैप्टन यंग, एक साहसिक ब्रिटिश मिलिट्री अधिकारी और श्री शोर, देहरादून के निवासी और अधीक्षक द्वारा वर्तमान मसूरी स्थल की खोज से आरम्भ हुई थी। उस समय इसकी छुटियों को व्यतीत करने का पर्यटन स्थल के रूप में नींव पड़ी थी। इसके नाम के बारे में प्रायः लोग यहां बहुतायत में उगने वाले एक पौधे ”’मंसूर”’ को इसके नाम का कारण बताते हैं, जो लोग, अभी भी इसे मन्सूरी कहते हैं। मसूरी की समुद्र तल से औसत ऊंचाई 2005 मीटर (6600 फ़ीट) है, जिसमें हरित पर्वत विभिन्न पादप-प्राणियों की भरमार है। उत्तर-पूर्व में हिम मंडित शिखर दिखाई पड़ता है, तो दक्षिण में दून घाटी और शिवालिक श्रेणी दिखती है। इसी कारण यह शहर पर्यटकों के लिए किसी परिकल्पना जैसा प्रतीत होता है। मसूरी गंगोत्री का प्रवेश द्वार है।
आईए अब मसूरी में घूमने लायक पर्यटक स्थलों की ओर चलते हैं । सबसे पहले बात करते हैं मसूरी झील की । मसूरी-देहरादून रोड पर यह नया विकसित किया गया पिकनिक स्पॉट है, जो मसूरी से लगभग 6 कि॰मी॰ दूर है। यह एक आकर्षक स्थान है। यहां पैडल-बोट उपलब्ध रहती हैं। यहां से दून-घाटी और आसपास के गांवों का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। मसूरी झील के दर्शन के बाद पहले थोड़ा स्नान कर लिया जाए । तो चलते हैं कैम्पटी फाल, यमुनोत्री रोड पर मसूरी से 15 कि॰मी॰ दूर 4500 फुट की ऊंचाई पर यह इस सुंदर घाटी में स्थित सबसे बड़ा और सबसे खूबसूरत झरना है, जो चारों ओर से ऊंचे पहाड़ों से घिरा है। झरने की तलहटी में स्नान तरोताजा कर देता है और बच्चों के साथ-साथ बड़े भी इसका आनंद उठाते हैं। मसूरी-यमुनोत्री मार्ग पर नगर से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित यह झरना पांच अलग-अलग धाराओं में बहता है, जो पर्यटकों के लिए खासा आकर्षण का केंद्र बना रहता है। यह स्थल समुद्रतल से लगभग 4500 फुट की ऊंचाई पर है। इसके चारों ओर पर्वत श्रृंखलाएं दिखाई देती हैं। अंगरेज अपनी चाय दावत अकसर यहीं पर किया करते थे, इसीलिए तो इस झरने का नाम कैंपटी (कैंप+टी) फाल है। यमुनोत्री के रास्ते में 1370 मीटर की ऊंचाई पर कैम्प्टी जलप्रपात स्थित है। मसूरी से इसकी दूरी 15 किलोमीटर है। यह मसूरी घाटी का सबसे सुंदर जलप्रपात है। कैम्प्टी जलप्रपात के निकट कैम्प्टी झील है। लोग यहां पर अपने परिवार एवं मित्रों के साथ समय बिताने के लिए आते हैं। यहां उपलब्ध नौकायन और टॉय ट्रेन की सुविधा बच्चों को खासा लुभाती है। यही नहीं, यह स्थल पिकनिक मनाने के इच्छुक लोगों में बहुत ही लोकप्रिय है। अब स्नान हो ही गया है तो कुछ देवी-देवताओं के दर्शन भी कर लिए जाए तो मंगल ही मंगल । आईए सबसे पहले चलते हैं ज्वालाजी मंदिर (बेनोग हिल), मसूरी से 9 किलोमीटर पश्चिम में 2104 मी. की ऊंचाई पर ज्वालाजी मंदिर स्थित है। यह बेनोग हिल की चोटी पर बना है, जहां माता दुर्गा की पूजा होती है। मंदिर के चारों ओर घना जंगल है, जहां से हिमालय की चोटियों, दून घाटी और यमुना घाटी के सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं। और अब चलते हैं नाग देवता मंदिर, कार्ट मेकेंजी रोड पर स्थित यह प्राचीन मंदिर मसूरी से लगभग 6 किलोमीटर दूर है। वाहन ठीक मंदिर तक जा सकते हैं। यहां से मसूरी के साथ-साथ दून-घाटी का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। अब ईश्वर की आराधना हो गई तो थोड़ा योग-ध्यान भी कर लेते हैं । आईए चलते हैं वाम चेतना केंद्र, टिहरी बाई-पास रोड पर लगभग 2 कि॰मी॰ की दूरी पर यह एक विकसित किया गया पिकनिक स्पॉट है, इसके आसपास पार्क है जो देवदार के जंगलों और फूलों की झाड़ियों से घिरा है। यहां तक पैदल या टैक्सी/कार से पहुंचा जा सकता है। पार्क में वन्य प्राणी जैसे घुरार, कण्णंकर, हिमालयी मोर, मोनल आदि आकर्षण के मुख्य केंद्र हैं। बस अब मन की शान्ति प्राप्ति होने के बाद केवल प्राकृतिक सौंदर्य का आनन्द लीजिए ।



1-गन हिल:- यहां पहुंचने में लगभग 20 मिनट का समय लगता है। रोप-वे की लंबाई केवल 400 मीटर है। सबसे ज्यादा इसकी सैर में जो रोमांच है, वह अविस्मरणीय है। गन हिल से हिमालय पर्वत श्रृंखला अर्थात् बंदरपंच, श्रीकांता, पिठवाड़ा और गंगोत्री समूह आदि के सुंदर दृश्य देखे जा सकते हैं, साथ ही मसूरी और दून-घाटी का विहंगम दृश्य भी यहां से देखे जा सकते हैं। आजादी-पूर्व के वर्षों में इस पहाड़ी के ऊपर रखी तोप प्रतिदिन दोपहर को चलाई जाती थी ताकि लोग अपनी घड़ियां सैट कर लें, इसी कारण इस स्थान का नाम गन हिल पड़ा।


2-कैमल बैक रोड:- 3 किलोमीटर लंबा यह रोड रिंक हॉल के समीप कुलरी बाजार से आरंभ होता है और लाइब्रेरी बाजार पर जाकर समाप्त होता है। इस सड़क पर पैदल चलना या घुड़सवारी करना अच्छा लगता है। हिमालय में सूर्यास्त का दृश्य यहां से सुंदर दिखाई पड़ता है। मसूरी पब्लिक स्कूल से कैमल रॉक जीते जागते ऊंट जैसी लगती है।


3-म्युनिसिपल गार्डन:- मसूरी का वर्तमान कंपनी गार्डन या म्युनिसिपल गार्डन आजादी से पहले तक बोटेनिकल गार्डन भी कहलाता था। कंपनी गार्डन के निर्माता विश्वविख्यात भूवैज्ञानिक डॉ॰ एच. फाकनार लोगी थे। सन्‌ 1842 के आस-पास उन्होंने इस क्षेत्र को सुंदर उद्यान में बदल दिया था। बाद में इसकी देखभाल कंपनी प्रशासन के देखरेख में होने लगा था। इसलिए इसे कंपनी गार्डन या म्युनिसिपल गार्डन कहा जाने लगा।



4-तिब्बती मंदिर:- बौद्ध सभ्यता की गाथा कहता यह मंदिर निश्चय ही पर्यटकों का मन मोह लेता है। इस मंदिर के पीछे की तरफ कुछ ड्रम लगे हुए हैं। जिनके बारे में मान्यता है कि इन्हें घुमाने से मनोकामना पूरी होती है।



5-चाइल्डर्स लॉज:- लाल टिब्बा के निकट यह मसूरी की सबसे ऊंची चोटी है। टूरिस्ट कार्यालय से यह 5 कि॰मी॰ दूर है, यहां तक घोड़े पर या पैदल भी पहुंचा जा सकता है। यहां से बर्फ के दृश्य देखना बहुत रोमांचक लगता है।



6-सर जॉर्ज एवरेस्ट हाउस:- 6 किलोमीटर की दूरी पर भारत के प्रथम सर्वेयर जनरल सर जॉर्ज एवरेस्ट की दि पार्क एस्टेट है, उनका आवास और कार्यालय यहीं था, यहां सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट का नाम इन्हीं के नाम पर रखा गया है।


7-ज्वालाजी मंदिर (बेनोग हिल):- मसूरी से 9 किलोमीटर पश्चिम में 2104 मी. की ऊंचाई पर ज्वालाजी मंदिर स्थित है। यह बेनोग हिल की चोटी पर बना है, जहां माता दुर्गा की पूजा होती है। मंदिर के चारों ओर घना जंगल है, जहां से हिमालय की चोटियों, दून घाटी और यमुना घाटी के सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं।

8-क्लाउड्स एंड:- यह बंगला 1838 में एक ब्रिटिश मेजर ने बनवाया था, जो मसूरी में बने पहले चार भवनों में से एक है। अब इस बंगले को होटल में बदला जा चुका है, क्लाउड्स एंड कहे जाने वाला यह होटल मसूरी हिल के एकदम पश्चिम में, लाइब्रेरी से 8 किलोमीटर दूर स्थित है। यह रिजार्ट घने जंगलों से घिरा है, जहां पेड़-पौधों की विविध किस्में हैं साथ ही यहां से हिमालय की हिमाच्छादित चोटियां और यमुना नदी को देखा जा सकता है। विदेशी पर्यटकों और हनीमून पर आने वाले दंपत्तियों के लिए यह सबसे उपयुक्त रिजार्ट है।


9-झड़ीपानी फाल:- यह फाल मसूरी-झड़ीपानी रोड पर मसूरी से 8.5 किलोमीटर दूर स्थित है। पर्यटक झड़ी- पानी तक 7 किलोमीटर की दूरी बस या कार द्वारा तय करके यहां से पैदल 1.5 किलोमीटर दूरी पर झरने तक पहुंच सकते हैं।



10-भट्टा फाल:- यह फाल मसूरी-देहरादून रोड पर मसूरी से 7 किलोमीटर दूर स्थित है। पर्यटक बस या कार द्वारा यहां पहुंचकर आगे की 3 किलोमीटर दूरी पैदल तय करके झरने तक पहुंच सकते हैं। स्नान और पिकनिक के लिए यह अच्छी जगह है।


मसूरी की ऊंचाई अधिक होने से यहां का तापमान सामान्य ही रहता है। जनवरी माह तक कई बार बर्फ गिरती रहती है । शर्दियों में कभी -कभी तापमान शून्य से नीचे भी गिर जाता है। लेकिन यहां आने वाले पर्यटकों के उत्साह में किसी प्रकार की कमी नही आती है। यहां सर्वाधिक पर्यटक दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा राज्य का आता है । क्योंकि दूरी कम है और एक से दो दिन में इस जगहों के पर्यटक वापस भी लौट पाते हैं । प्रकृति का अनमोल खजाना है मसूरी ।

























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