धारी देवी उत्तराखंड


धारी देवी उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच अलकनंदा नदी के तट पर स्थित एक मंदिर है। मंदिर देवी धारी की मूर्ति के ऊपरी आधे भाग में स्थित है, जबकि मूर्ति का निचला आधा भाग कालीमठ में स्थित है, जहाँ देवी काली के प्रकट रूप में उनकी पूजा की जाती है। वह उत्तराखंड के संरक्षक देवता माने जाते हैं और चार धाम के रक्षक के रूप में पूजनीय हैं। उनका मंदिर भारत में 108 शक्ति स्थालों में से एक है, जैसा कि श्रीमद देवी भागवत ने कहा था।  मंदिर में स्थित पुजारियों के अनुसार यह कथा है कि एक रात जब भारी बारिश के चलते नदी में जल बहाव तेज था । धारी गाँव के समीप एक स्त्री की बहुत तेज ध्वनि सुनाई दी , जिससे गाँव के लोग डर गए , कि किसी स्त्री के साथ कोई अनहोनी ना हो गयी हो । जब गाँव के लोगों ने उस स्थान के समीप जाकर देखा तो वहाँ गाँव के लोगों को पानी में तैरती हुई एक मूर्ति दिखाई दी । किसी तरह ग्रामीणों ने पानी से वो मूर्ति निकाली और मूर्ति निकालने के बाद कुछ ही पल में देवी आवाज ने उन्हें मूर्ति उसी स्थान पर स्थापित करने के आदेश दिये , तब से धारी गाँव के लोगों ने इस स्थल को धारी देवी का नाम दिया। 


अलकनंदा हाइड्रो पावर कंपनी लिमिटेड (AHPCL) द्वारा निर्मित 330 मेगावाट के अलकनंदा हाइड्रो इलेक्ट्रिक डैम के निर्माण का रास्ता देने के लिए, देवी के मूल मंदिर को 16 जून 2013 को ध्वस्त कर दिया गया था। संयोग से, मूर्ति ले जाने के कुछ घंटों बाद, इस क्षेत्र ने सामना किया कि 2004 की सुनामी के बाद देश की सबसे खराब प्राकृतिक आपदाओं में से एक क्या होगा। 2013, उत्तर भारत की बाढ़ एक बहु-दिन बादलों की वजह से हुई, जिसके परिणामस्वरूप विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से पूरे तीर्थ शहर बह गए और सैकड़ों लोग मारे गए। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का मानना ​​है कि, उत्तराखंड को देवी की इच्छा का सामना करना पड़ा क्योंकि वह बाढ़ के बाद खंडहर में बचे 330 मेगावाट जलविद्युत परियोजना के लिए रास्ता बनाने के लिए अपने मूल निवास स्थान से स्थानांतरित कर दिया गया था। 1882 में एक स्थानीय राजा द्वारा इसी तरह के प्रयास के परिणामस्वरूप केदारनाथ में भूस्खलन हुआ था। अब नए मंदिर का निर्माण उसके मूल स्थान पर किया जा रहा है। क्षेत्र में बनाई जा रही 330 मेगावाट की जल विद्युत परियोजना के सुचारू संचालन के लिए, मंदिर की ऊँचाई इतनी बढ़ा दी गई कि वह अलकनंदा नदी के ऊपर खड़ा हो गया। 16 जून, 2013 की सुबह, धारी देवी मंदिर को हटा दिया गया और अलकनंदा नदी से लगभग 611 मीटर की ऊंचाई पर कंक्रीट के प्लेटफार्म पर स्थानांतरित कर दिया गया, ताकि वह नदी में न डूबे। 

मंदिर में माँ धारी की पूजा-अर्चना धारी गाँव के पंडितों द्वारा किया जाता है। यहाँ के तीन भाई पंडितों द्वारा चार-चार माह पूजा अर्चना की जाती है । मंदिर में स्थित प्रतिमाएँ साक्षात व जाग्रत के साथ ही पौराणिककाल से ही विधमान है । धारी देवी मंदिर में भक्त बड़ी संख्या में पूरे वर्ष मां के दर्शन के लिए आते रहते हैं । धारी देवी मंदिर में मनाए जाने वाले कई त्योहार है , उनमें से दुर्गा पूजा व नवरात्री में विशेष पूजा मंदिर में आयोजित की जाती है , यह त्यौहार धारी देवी मंदिर के महत्वपूर्ण त्योहार हैं । मंदिर में प्रतिवर्ष चैत्र व शारदीय नवरात्री में हजारों श्रद्धालु अपनी मनौतियों के लिए दूर-दूर से पहुँचते हैं । मंदिर में सबसे ज्यादा नवविवाहित जोड़े अपनी मनोकामना हेतु माँ का आशीर्वाद लेने पहुँचते हैं।

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