आज कल की जीवन शैली में जोड़ो का दर्द एक आम समस्या हो गई है। गांव हो या शहर हर घर में कोई न कोई इस समस्या से दो-चार हो रहा है। दर्द से लोग तड़प रहें हैं और जब राहत नही मिल रही है तो दर्द निवारण के लिए अंग्रेजी दवाओं का सेवन कर रहें हैं। चाहे अनचाहे दर्द से निजात पाने के चक्कर में लगातार अंग्रेजी दवाओं के सेवन से मनुष्य शरीर के अन्य ऊतक प्रभावित हो रहें और व्यक्ति दूसरी अन्य बीमारियों से ग्रसित होते जा रहें हैं। दर्द के नाम पर बाजरों में तरह-तरह के फर्जी तेल बेचे जा रहे हैं। जिनसे क्षणिक आराम तो मिलता है लेकिन ये तेल असल समस्या को खत्म करने में कार्य नही करते हैं। 

डॉक्टर के पास भी नही है शर्तिया इलाज:- आज भारत में लगभग 80% बुजुर्ग या 60 वर्ष से ऊपर के लोग घुटनों के दर्द से परेशान हैं। दर्द के कारणों को लेकर जब ऐसे व्यक्ति डॉक्टर के पास जाते हैं तो डॉक्टर उनको घुटने बदलवाने की सलाह देता है। साथ ही वह इतना भय उत्पन्न कर देता है कि मरीज साधरण सी इस समस्या को बहुत बड़ी समझ लेता है और घुटने बदलवाने को तैयार भी हो जाता है। लाखों रुपये खर्च करने के बाद डॉक्टर उसको 10 से 15 वर्ष की गारेंटी देता है, और कई बार तो मरीज उसके बाद भी आराम नही पाता है। जबकि आयुर्वेद कहता है कि ऐसा करने की कोई आवश्यकता ही नही है। हाँ, आयुर्वेद में संयम की बहुत आवश्यकता होती है, लेकिन बीमारी जड़ से खत्म होगी इसका प्रमाण देता है आयुर्वेद।

क्यों होता है घुटनों या जोड़ो में दर्द:- घुटनों या जोड़ो में दर्द की तीन मुख्य वजह होती है। जिसमें से दो प्राकृतिक रूप से हो सकती हैं और एक अप्राकृतिक रूप से । प्राकृतिक रूप से होने वाली दो वजहों में से पहली वजह है- घुटने या जोड़ में मज्जा का कम होना । दरअसल मनुष्य शरीर में प्रत्येक जोड़ में एक तरल पदार्थ होता है जो हड्डियों को रगड़ने से बचाता है। लेकिन बढ़ती उम्र के साथ यह तरल (मज्जा) कम होने लगता है जिसके संकेत मनुष्य को मिलते रहते हैं लेकिन व्यक्त पर मनुष्य ध्यान नही देता है और दर्द से ग्रसित हो जाता है। दरअसल आज के खान पान के कारण यह मज्जा जल्दी प्रभावित होने लगा है जिस कारण कुछ लोगों को 60 वर्ष से पहले भी दर्द की शिकायत होने लगी है। जोड़ो में दर्द का दूसरा प्राकृतिक कारण हैं मांसपेशियों में कमजोरी। मनुष्य शरीर में सर्वाधिक दाब (Pressure) जोड़ो पर ही होता है। चाहे वह शरीर का कोई भी जोड़ हो। किसी भी भारी वस्तु के साथ कार्य करने पर सर्वाधिक दाब शरीर के विभिन्न जोड़ो पर ही आता है। शरीर में हड्डी केवल शरीर के मांशपेशियों को थामने का जरिया जरूर है लेकिन उसको गतिमान करना और निर्देशित करना मांशपेशियों का ही कार्य है। ऐसे में अगर मांशपेशियां ही कमजोर होने लगती हैं तो जोड़ो के आस पास एकत्रित मांस पर हर हरकत के साथ दाब बनने लगता है और जोड़ के आस पास दर्द महसूस होने लगता है। जोड़ो में दर्द का एक मात्र अप्राकृतिक कारण है पूर्व में हुई कोई दुर्घटना या चोट का होना। इस स्थिति में भी दो कारण से दर्द पैदा हो सकता है। पहला कारण है अगर हड्डी सही जगह पर न बैठी हुई हो और दूसरा कारण है कि दुर्घटना में जोड़ के आस पास का मांस भी प्रभावित हुआ है। अप्राकृतिक रूप से दर्द रहने वाले व्यक्ति को कभी कभी डॉक्टरी इलाज की जरूरत होती है और दूसरा आयुर्वेद के इलाज को अधिक समय तक अपनाना पड़ता है। जबकि प्राकृतिक रूप से दर्द के मरीज को डॉक्टरी सलाह की कोई आवश्यकता नही होती और वह 100% जोड़ो के दर्द से यहां दिए गए इलाज से ठीक हो जाएगा।

दर्द से निजात कैसे पाए:- यहां दिए गए इलाज में दर्द से 100% निजात मिलेगा और कम हो रहे मज्जा में धीरे-धीरे सुधार होने लगेगा। अगर मनुष्य केवल मांशपेशियों की वजह से दर्द महसूस कर रहा होगा तो महज पांच दिन में ही आराम मिल जाएगा। लेकिन अगर जोड़ो में खत्म हो रहे मज्जा की वजह से दर्द हो रहा होगा तो इलाज लगातार छह माह तक करना होगा। इसमें भी अगर दर्द कुछ ही माह से शुरू हुआ हो तो छह माह में 80% आराम मिल जाएगा लेकिन अगर उससे अधिक समय बीत गया हो तो यही प्रक्रिया कम से कम एक वर्ष लगातार करने से दर्द में आराम मिलेगा। 

इलाज के लिए आवश्यक सामग्री:- काले तिल का तेल, लौंग, अजवायन, जयफल, धतूरे के पत्ते, काले चने और दूध । तिल काले ही होने चाहिए, इनका 1 किलो तेल निकाल लें । 10 लौंग, 100 ग्राम अजवायन, 04 जयफल और 04 पत्ते धतूरे या 10 पत्ते काली भाँग के एकत्रित कर लें। एक साफ सूखे बर्तन में 1 किलो काले तिल का तेल डालकर उसको हल्की आंच पर चूल्हे में रख दें। जब तेल हल्का गर्म हो जाए तो उसमें 10 लौंग पीसकर,100 ग्राम अजवायन, 04 जयफल तोड़कर और 04 पत्ते धतूरे या 10 पत्ते भांग के टुकड़े करके डाल दें। तेल को हल्की आंच पर उस वक्त तक पकने दें जब तक उसमें से 25% तेल कम न हो जाए। उसके बाद उसको ठंडा होने के लिए छोड़ दें। जब तेल ठंडा हो जाए तो उसको छानकर उसी तिल के तेल वाली बोतल या अन्य किसी बोतल में भर लें। 

इस्तेमाल कैसे करें:- प्रति दिन सुबह और शाम को आधे घण्टे की मालिस, अगर दर्द कुछ ही माह से शुरू हुआ हो। साथ में काले चने को अच्छे से उबाल लें और उसमें कुछ भी न डालें, रोज एक कटोरी उबला चना सुबह नास्ते से पहले दूध के साथ लें। मालिस के बाद पंखे या ऐसी की हवा में नही बैठना है। और अगर बैठना ही पड़े तो जोड़ को अच्छे से गर्म पट्टी से ढक लें। अगर दर्द को छह माह से अधिक का समय हो गया है तो मालिस को हल्के तेज हाथों से दबा के करें और साथ में हल्के हल्के गर्म हाथों से सेका भी दें। आपको अंकुरित काल चना दिन भर में एक कटोरी लेना है और दूध में हल्दी की कच्ची गांठ ( एक गिलास में 10 से 15 ग्राम) डालकर गर्म करना है। जब दूध बहुत हल्का गर्म हो तो दूध को पी लेना हैं। दूध आपको केवल सुबह ही पीना हैं। मालिस किए गए जोड़ को ठंड से बचाना है। पंखे या ऐसी से बिल्कुल दूर रहना हैं। साथ में पांव के पंजे को हल्के हल्के दिनभर खिंचाव देते रहना है। अप्रकृतिक रूप से दर्द वाले मिरोजों को पहले x-ray करवा लेना है। अगर समस्या मांशपेशियों और मज्जा से सम्बन्धित हो तो यही प्रक्रिया अपनानी है अन्यथा डॉक्टरी इलाज ही करवाए ।