"राधिका" एक त्याग की गाथा


उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रो में चैत्र माह दीसा-ध्याणियों (विवाहिता लड़कियों) के लिए उल्लास का माह माना जाता है । इस माह में नवविवाहिता बेटियां अपने मायके से भेंट करने के लिए आने वालों (माता-पिता या भाई) का बेसब्री से इंतजार करती रहती हैं । या वह स्वयं ही मायके को चली आती हैं । इस कथा में एक पिता अपनी विवाहिता पुत्री से मिलने के हर्सोल्लास पूर्वक भेटोली (बेटी के ससुराल में ले जाए जाने वाले पकवान) लेकर पहुंचता है और वहाँ उसको जो वृतांत दिखता है वही इस सच्ची घटना का सम्पूर्ण भाव है ।



राधिका के पिताजी चिंतातुर हैं कि गाँव में सभी लोगों की बेटियां चैत्र माह में मायके चली आयी हैं लेकिन उनकी पुत्री क्यों नही आयी ? राधिका की माँ भी व्याकुलता से कहती है कि हे जी ! कौन जाने वहां हमारी बेटी सुखी भी है या नही । आप कल सुबह यहाँ से उसके ससुराल जाओ और उसको घर लेकर आ जाओ । यह कहकर राधिका की माँ अपनी बेटी के ससुराल पक्ष के लिए पकवान बनाने लगती है । किन्तु पहला ही पकवान जल जाता है और उसके मन में अशुभ समाचार की आशंका उत्पन्न हो जाती है । सोचती है, न जाने मेरी राधिका कैसी होगी ?


अगले दिन सुबह राधिका के पिताजी भेटोली लेकर उसके ससुराल पहुंचते है । वहाँ पहुंचते ही अपने समधी से पूछते हैं कि मेरी राधिका कहाँ है ? कई माह हो गये उससे भेंट नही हुई । समधी बात को टालते हुए कहता है कि आपकी बेटी घास लेने जंगल में गयी हुई है, आ जाएगी तब तक आप बैठकर तम्बाकू पियो । लेकिन पुत्री से भेंट के लिए व्याकुल पिता राधिका को देखे बिना कुछ भी नही स्वीकारता है । दिन ढल गया गांव की सभी बहु बेटियां घास लेकर घर पहुँच गयी लेकिन राधिका कहीं नजर नही आयी । रात हो गयी और राधिका घर नही आयी न ही कोई उसको ढूढने गया । बाद में राधिका की ननद ने भेद खोल ही दिया- " मेरी पापी माँ ने झूठा संदेह करके कुदाल की चोट से भाभी की हत्या कर दी है।" घर के खाजा (भूने हुए गेहूँ, सोयाबीन आदि) मैंने ही खाये थे और बाकी के खाद्य पदार्थ भी मैंने ही छुपा के खाये थे । मेरा भाई बरेली गया हुआ है और माँ कहती है कि तेरा भाई, तेरी भाभी के बस में हो गया है । सारे सम्मोहन की जड़ भाभी को समझकर पापी माँ ने भाभी को ही मानकर हत्या कर दी और जमीन में दबा दिया ।


अब बेटी की इस दुःखद मृत्यु की खबर को सुनकर राधिका के पिता स्वयं को न सम्भाल सके । और बड़ी जोर जोर से चिल्ला कर रोने लगे । क्रोध बस उन्होंने भेटोली (पकवान इत्यादि) को गधेरे में फेंक दिया । और उसी क्षण वहां से लौट गये । घर पहुंचकर सारा वृतांत राधिका की माँ को सुनाया तो वह भी स्तब्ध होकर गिर पड़ी और कहने लगी हाय! यह क्या हो गया भगवान । मेरी प्यारी बेटी के साथ यह कैसा अन्याय किया तूने ।


" अबला जीवन कैसी रे तेरी कहानी, आँचल में दूध और आँखों में पानी" । बेटी के माता पिता की विवशता की करुण गाथा । ससुराल में बेचारी बहू के सर्व समर्पण के बाद भी अधिकारहीनता, कृत-अकृत छोटे से अपराध के लिए पुत्र बहू की हत्या, इस समाज के मुँह पर कालिक है । स्त्री वँश की वह बेल है जिस से दो कुलों के पुष्प खिलते हैं और ऐसी बेल को बिना दोष ही मृत्यु दण्ड इस गाथा की करुणा को पूर्णतः उजागर करती है।"

(BDO) Block Development Officer Vacancy Uttarakhand 2020
Uttarakhand Education Department- 658 Vacancies
अगस्तमुनि से रुद्रप्रयाग जा रही बोलेरो हादसे का शिकार, सड़क पर ही पलट गई गाड़ी ।
श्रीनगर गढ़वाल में यूटिलिटी चालक ने स्कूटी सवार को कुचल डाला, युवक की मौत ।
कर्णप्रयाग में बोलेरो वाहन दुर्घटनाग्रस्त, एक की मौत दूसरा गम्भीर रूप से घायल ।
कौड़ियाला-तोताघाटी में 15 मीटर सड़क ढही, मरम्मत का कार्य जारी ।
PMGSY RECRUITMENT 2020 UTTARAKHAND
पाकिस्तान की गोलाबारी में ऋषिकेश के राकेश डोभाल शहीद, परिवार का रो रोकर बुरा हाल ।
कॉलेज की छात्रा से किया शादी वादा फिर तीन साल बनाए शाररिक सम्बन्ध, अब शादी के लिए चाहिए पांच लाख दहेज ।
 वर्ग-4 (सहयोगी/गार्ड) के पदों पर भर्ती, 23 दिसम्बर अंतिम तारीख ।

यहां उत्तराखंड राज्य के बारे में विभन्न जानकारियां साँझा की जाती है। जिसमें नौकरी,अध्ययन,प्रमुख समाचार,पर्यटन, मन्दिर, पिछले वर्षों के परीक्षा प्रश्नपत्र, ऑनलाइन सहायता,पौराणिक कथाएं व रीति-रिवाज और गढ़वाली कविताएं इत्यादि सम्मिलित हैं। जो हर प्रकार से पाठकों के लिए उपयोगी है ।