लगभग 1200 फुट की ऊंचाई पर बसा ये क्षेत्र गढ़वाल मंडल के सबसे सुंदर स्थानों में से एक है। जनवरी-फरवरी के महीनों में आमतौर पर बर्फ की चादर ओढ़े इस स्थान की सुंदरता जुलाई-अगस्त के महीनों में देखते ही बनती है। इन महीनों में यहां मीलों तक फैले मखमली घास के मैदान और उनमें खिले फूलों की सुंदरता मन को लुभाने वाली होती है । इसी वजह से इसकी तुलना स्विट्जरलैंड से की जाती है। खास व बात ये है कि पूरे गढ़वाल क्षेत्र में यही अकेला क्षेत्र है जहां बसों के माध्यम बुग्यालों की दुनिया में सीधे प्रवेश किया जा सकता है। अतः यह असाधारण क्षेत्र श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यात्रा भ्रमण हेतु सुगम भी है । यह यात्रा ऋषिकेश से श्रीनगर होते हुए अलकनंदा के किनारे किनारे पहाड़ी दृश्य के साथ आगे बढ़ती जाती है । रुद्रप्रयाग पहुंचने पर यदि ऊखीमठ का रास्ता लेना है तो अलकनंदा को छोडकर मंदाकिनी घाटी में प्रवेश करना होता है। यहां से मार्ग संकरा है। इसलिए चालक को गाड़ी चलाते हुए बहुत सावधानी बरतनी होती है। मार्ग अत्यंत लुभावना और सुंदर है। आगे बढ़ते हुए अगस्त्य मुनि नामक एक छोटा सा कस्बा है जहां से हिमालय की नंदाखाट चोटी के दर्शन होने लगते हैं। चोपता की ओर बढते हुए रास्ते में बांस और बुरांश का घना जंगल और मनोहारी दृश्य पर्यटकों को लुभाते हैं। चोपता से महज तीन किलोमीटर तुंगनाथ मंदिर है । यह तीन किलोमीटर का मार्ग सुंदर बुग्याल के पुष्पों से किसी को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है । तुंगनाथ से नीचे जंगल की सुंदर रेंज और घाटी का जो दृश्य उभरता है, वो बहुत ही अनूठा है। चोपता से गोपेश्वर जाने वाले मार्ग पर कस्तूरी मृग प्रजनन फार्म कंचुला खरक कस्तूरी मृग अभयारण्य भी है। यहां पर कस्तूरी मृगों की सुंदरता को निकटता से देखा जा सकता है। चोपता से लगभग आठ किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद देवहरिया ताल पहुंचा जा सकता है जो कि तुंगनाथ मंदिर के दक्षिण दिशा में है। इस ताल की कुछ ऐसी विशेषता है जो इसे और सरोवरों से विशिष्टता प्रदान करती है। इस पारदर्शी सरोवर में चौखंभा, नीलकंठ आदि हिमाच्छादित चोटियों के प्रतिबिंब स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं। इस सरोवर का कुल व्यास पांच सौ मीटर है। इसके चारों ओर बांस व बुरांश के सघन वन हैं तो दूसरी ओर एक खुला सा मैदान है। चोपता के बारे में ब्रिटिश कमिश्नर एटकिन्सन ने कहा था कि जिस व्यक्ति ने अपने जीवनकाल में चोपता नहीं देखा उसका इस पृथ्वी पर जन्म लेना व्यर्थ है। बस अब ज्यादा नही लिखूंगा । आपको चोपता की कुछ सुनहरी तस्वीरों के साथ छोड़े देता हूँ । उम्मीद है आपको इस मनभावन दृश्य को देखने का अवसर मिले और आप अपनी आंखों से वर्णित स्थलों का अवलोकन कर सकें ।