भगवान उमरा नारायण मंदिर भगवान विष्णु का पवित्र निवास है जहाँ माँ अलकनंदा अपनी पूर्ण शांति में बहती है। यह मंदिर उत्तराखंड के मुख्य शहर रुद्रप्रयाग से 5-7 किमी दूर है। यह मंदिर आदि शंकराचार्य द्वारा बनाया गया था जब वह बद्री धाम के रास्ते पर थे। अपने पापों को धोने के लिए माँ अलकनंदा है, जिसकी तेज ध्वनि आपके कान के ड्रम को मंत्रमुग्ध कर देती है और आपको पवित्रता का एहसास दिलाती है। भगवान उमरा निकटवर्ती गांव उमरोला सोर, सुमेरपुर और सन्न के इस्त देव हैं। हर कटाई के बाद, फसलों का पहला समूह इस्त देव के पवित्र चारणों में संपन्न होता है और जिनके आशीर्वाद से आशावाद का संचार होता है और उनके सभी अवयवों की भलाई होती है। बहुत समय पहले उमरोला सोर के ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में भगवान उमरा नारायण की दैनिक पूजा के लिए गरोला पंडित की नियुक्ति की। आजकल मंदिर की पूजा महंत सरजू दास जी की देखरेख में की जाती है। 

उमरा नारायण मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। मंदिर को लेकर मान्यता है कि इसका निर्माण आदि शंकराचार्य ने करवाया था। दरअसल जब आदि शंकराचार्य बदरीनाथ धाम जा रहे थे, तब वह अलकनंदा नदी की निकटता में स्थित इस जगह रुके और उन्होंने उमरा नारायण मंदिर का निर्माण करवाया। उमरा नारायण मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को अलकनंदा नदी की तेज ध्वनी साफ सुनाई देती है। मंदिर की भव्यता और अद्भुत निर्माण शैली श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। यह मंदिर समूह धार्मिक श्रद्धालुओं, शांतिप्रिय लोगों और अध्यात्म के जिग्यासुओं के लिए मनोरम तीर्थ है। उमरा नारायण मंदिर में क्षेत्र के श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। भगवान उमरा नारायण को ग्राम सन्न के गैरोला कबीले का कुल देवता भी माना जाता है। श्रद्धालु अपनी फसल आने के बाद, फसलों का पहला समूह भगवान को अर्पित करते हैं, जिसे आशीर्वाद और समृद्धि का समर्थन माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि ऐसा करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और उनके जीवन में सम्रद्धि आती है। उमरा नारायण मंदिर, रुद्रप्रयाग के दूसरे प्रसिद्ध कोटेश्वर महादेव मंदिर के नजदीक ही स्थित है। ऐसे में श्रद्धालु उमरा नारायण मंदिर आते समय कोटेश्वर महादेव मंदिर में भी दर्शन कर सकते हैं। अलकनंदा नदी के किनारे गुफा के रूप में मौजूद कोटेश्वर महादेव मंदिर को लेकर मान्यता है कि केदारनाथ जाते समय भगवान शिव ने यहां पर साधना की थी।

यह प्रसिद्द धार्मिक स्थल रुद्रप्रयाग में है। रुद्रप्रयाग से नजदीकी हवाई अड्डा लगभग 150 किलोमीटर दूर देहरादून में स्थित है, जबकि रुद्रप्रयाग, ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से लगभग 140 किलोमीटर दूर स्थित है। रुद्रप्रयाग सड़क मार्ग द्वारा प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। रुद्रप्रयाग हरिद्वार से 160 किलोमीटर व टिहरी 112 किलोमीटर दूर स्थित है।