कुछ लिखकर मिटा देना आदत नही थी....
मजबूरी सिर्फ इतनी है कि,
वो शब्दों की अहमियत कभी समझे ही नही ।
#DD

जज्बातों की दुकान पर सपने खरीदने आये थे,,,
बहुत देर से मालूम हुआ ?
जज्बाती होकर सपना ही बेच आये हैं।
#DD

मैं हर रोज बस यही झूठ सुनने को उसे फोन करता हूँ..
यहाँ कोई मसला है, तुम्हारी आवाज कट रही है ।
#AH

तुम्हें छोड़कर दूर चले जायेंगे, जो कहते थे
आज भी खुश नही, ये देखकर परेशान हूँ मैं।
अगर किसी रोज खटखटाएंगे वो दरवाजा मेरा
अपनी जगह किसी और को देखकर, रोएंगे जार जार ।
#DD

जवानी उछाल मरती है,
बुढापा जिंदगी उधार मांगता है।
एक ही जिंदगी के दो कोने
एक चकाचौंध में बीत जाता है 
और एक बीतने के लिए सहारा मांगता है।।
#DD


आपकी महफिल में आकर दिल हार बैठा हूँ....

यू तो बहुत से किस्से हैं मेरी महब्बत के, 
लेकिन सबसे बगावत कर बैठा हूँ।
किसी की आंखों से बगावत, किसी की हँसी से बगावत
हर अंजुमन से यू नजरें चुरा बैठा हूँ ।
आपकी महफ़िल में आकर दिल हार बैठा हूँ.....

अब अपने कद्रदानों में हमें भी सुमार करो
अगर हो सके तो सिर्फ हमे ही प्यार करो
कई आजाद उड़ानों के बाद तुम्हारी गिरफ्त में बैठा हूँ।
आपकी महफिल में आकर दिल हार बैठा हूँ.....

बहुत कुछ कहने को दिल है, तारीफ में तुम्हारी !
पहली बार शब्दों के चयन में उलझ रहा हूँ।
मीठा कहूँ या नमकीन ? ये लहजा तुम्हरा
नजरों में जैसे तुम्हारी अदाओं का मैखाना सजा बैठा हूँ।
आपकी महफिल में आकर दिल हार बैठा हूँ .....

उम्मीद, तुम्हें कबूल होंगे जज्बात मेरे
हर नाजों हरम पे ये दिल भी राजी लगता है
पहली दफा दिल किसी के लिए बगावत कर बैठा है
सच है, आपकी महफिल में आकर दिल हार बैठा हूँ....
#DD

चाहकर भी जो मेरे न हुए, 
पाकर भी जो तुम्हें न मिले ।
एक सुन्दर सा ख्वाब और मेरा जैसा शख्स !
गले लगकर बहुत रोया मगर, 
सिसकियाँ किसी ने न सुनी ।

#DD