HISTORY OF UTTARAKHAND-उत्तराखंड राज्य का निर्माण



5 से 6 मई 1937 को श्रीनगर गढ़वाल में जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का एक विशेष अधिवेशन चल रहा तो स्थानीय नेताओं ने अलग पहाड़ी राज्य की मांग उठाई थी और जवाहर लाल नेहरू ने इसकासमर्थन भी किया था ।इसके बाद 1938 में श्रीदेव सुमन ने दिल्ली में गढ़देश सेवा संघ के नाम से एक संगठन बनाया जिसका उद्देश्य भी पहाड़ी लोगों के लिए अलग राज्य की माँग था तथा बाद में इस संगठन का नाम हिमालय सेवा संघ कर दिया गया था ।

★ 1940 में हल्द्वानी सम्मेलन में बद्रीदत्त पण्डे व अनुसूया बहुगुणा ने पृथक राज्य की माग की लेकिन संयुक्त काल के तात्कालिक सर्वेसर्वा गोबिन्दबलभ पन्त ने इस मांग को ठुकरा दिया । इसके 7 साल बाद 15 अगस्त 1947 को पूरा देश आजाद हो गया लेकिन पर्वतीय क्षेत्र के लोगों ने अलग राज्य की मांग जारी रखी ।

★ 1952 में पर्णिकर आयोग के अध्यक्ष ए.एम. पर्णिकर ने उत्तराखंड राज्य की मांग का समर्थन किया लेकिन इस बार गोबिन्दबलभ पन्त ने पर्वतीय क्षेत्र में संसाधन व रोजगार की समस्या का हवाला देते हुए यह मांग पुनः ठुकरा दी ।

इन सब के बीच राज्य में कई संगठनों का उदय हुआ और इन सब ने अलग अलग समय पर अलग राज्य की मांग उठाई । उस समय उत्तराखंड उत्तर प्रदेश का हिस्सा था और इसकी राजधानी लखनऊ में थी अतैव दूर दराज पर्वतीय क्षेत्रों पर रहने वाले लोग का उचित ध्यन रख पाना लखनऊ में बैठे लोगों के लिए आसान काम नही था ।जिस वजह से पर्वतीय क्षेत्र पर शिक्षा,स्वास्थ्य,गरीबी व पेजल जैसे समस्याओं का खतरा मंडराने लगा और उत्तराखंड की जनता को अलग राज्य के लिए आंदोलन करने पड़े ।
कुछ संगठन ;-
हिमालयसेवा संघ -1938
गढ़देश जागृत संस्था - 1939
पर्वतीय विकास जनसंस्था - 1950
पर्वतीय राज्य परिषद -25 जून 1967
कुमाऊँ राष्ट्रीय मोर्चा ( पी.सी.जोशी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव) - 30 अक्टूबर 1970
उत्तराँचल परिषद - 1972
उत्तराखंड क्रांति दल ( देवी दत्त पन्त - कुमाऊँ वि.वि.कुलपति) - 25 जुलाई 1979
उत्तराखंड उत्थान परिषद - 1988
उत्तराखंड मुक्ति मोर्चा - 1991
संयुक्त उत्तराखंड मोर्चा - 1994
उत्तराखंड पीपुल्स फ्रंट - 1994
उत्तराखंड युवा संघर्ष समिति - 1994
★ 1957 में मानवेंद्रशाह ने भी पृथक राज्य की मांग की और अपने स्तर पर आंदोलन करने की सुरुवात की ।
★ 1984 में आल इंडिया स्टूडेंट फैड्रेशन ने 900 किलोमीटर साईकल यात्रा निकल कर अलग राज्य की मांग की ।
★ 23 अप्रेल 1987 को उत्तराखंड क्रांति दल के उपाध्यक्ष त्रिवेंद्र पंवार ने संसद में एक पत्र बम फेंका जिसके लिए उन्हें बहुत यातनाएं सहनी पड़ी ।
1987 में भाजपा के लाल कृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में अल्मोड़ा के पार्टी सम्मेलन में पर्वतीयक्षेत्र को अलग राज्य देने की मांग स्वीकार कर ली गई और इसका नाम उत्तरांचल स्वीकार किया गया ।
1990 में उत्तराखंड क्रांति दल के विधायक जसवंत सिंह बिष्ट ने विधानसभा में पृथक राज्य का पहला प्रस्ताव रखा और 1991 के चुनाव में बीजेपी ने अलग राज्य की स्थापना को अपने घोषणा पत्र में शामिल किया तथा वादे के अनुसार 20 अगस्त 1991 को प्रदेश की भाजपा सरकार ने यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया था लेकिन केंद्र में स्थित कांग्रेस सरकार ने यह प्रस्ताव ठण्डे बस्ते में डाल दिया और इस पर कोई निर्णय नही हुआ ।
जुलाई 1992 में उत्तराखंड क्रांति दल ने एक दस्तावेज जारी किया जिसमें गैरसैंण को राजधानी घोषित किया गया और 21 जुलाई 1992 को काशी सिंह ऐरा ने गैरसैंण में प्रस्तावित राजधानी की नीव डाली और उसका नाम वीरचन्द्र सिंह गढ़वाली के नाम पर चन्द्र नगर की घोषणा की ।
★ जनवरी 1993 में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने रमाशंकर कौशिक की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया और इस समिति ने अपनी पहली रिपोर्ट मई 1994 में पेस की जिसमें पर्वतीय क्षेत्र के 8 जिलों को उत्तराखंड में मिलाकर इसकी राजधानी गैरसैंण बनाने की सिफारिश की थी । 21 जून 1994 को यह प्रस्ताव मुलायम सिंह ने स्वीकार कर लिया था और प्रस्ताव विधानसभा में सर्वसहमति से पास कर अगस्त 1994 में पृथक राज्य उत्तरांचल के गठन का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया था ।
◆ जून 1994 में शिक्षण संस्थान व नौकरियों में मुलायम सिंह सरकार ने आरक्षण की नई व्यवस्था लागू की जिसके अंतर्गत कुल सीटों का 50% सीट आरक्षित होने का प्रावधान था और इस नई OBC विरुद्ध आरक्षण नीति ने प्रदेश में भूचाल ला दिया जिस वजह प्रदेश में आंदोलन दौर सुरू हो गया ।
★ पौड़ी के नेता इंद्र मणि बडोनी जिनको उत्तराखंड का गांधी भी कहा जाता है ने 7 साथियों के साथ 7 अगस्त 1994 को आमरण अनसन सुरू कर दिया जिस पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया ।
★ 15 अगस्त 1994 को काशी सिंह ऐरा के नेतृत्व में नैनीताल में भी आमरण अनसन सुरू हो गया ।
राज्य बनने ही वाला था की इन्ही आंदोलनों ने हिंसा का रूप इख्तियार कर दिया और प्रदेश में दंगे भड़क गये ।
★★उत्तराखंड के यादगार आंदोलन★★
● खटीमा गोलीकांड
● मसूरी गोलीकांड
● रायपुर तिराह( मुजफ्फरनगर) गोलीकांड
● श्रीयंत्र टापू की घटना
◆ खटीमा गोलीकांड:- जब आंदोलनकारी पृथक राज्य की मांग व आरक्षण के मुद्दे पर बात करने के लिए खटीमा में एकत्रित हुए तभी 1 सितम्बर 1994 को खटीमा में छात्रों एवं पूर्व सैनिको की रैली पर पुलिस ने गोलियां चला दी जिसमे 25 लोगों की मृत्यु हो गई थी । इस दिन को उत्तराखंड में ब्लैक डे के नाम से जाना जाता है ।
◆मसूरी गोलीकांड:- 2 सितम्बर 1994 को खटीमा गोलीकांड के विरोध में मसूरी में मौन जुलूस निकाला गया लेकिन यहां भी पुलिस ने गोलियां चला दी और 8 लोगों की यहां पर मृत्यु हो गयी जिसमें दो महिलाएं हंसा घनाई और बेलमती चौहान शामिल थी । इस घटना से भड़के लोग पुलिस से भीड़ गये और पुलिस अधीक्षक उमा कांत त्रिपाठी को मौत के घाट उतार दिया ।
◆ रायपुर तिराह गोलीकांड :- 7 दिसम्बर 1994 को एक सर्वदलीय बैठक में 27% आरक्षण को उत्तराखंड में लागू करने की सहमति हुई । इसके बाद छात्रों ने रामनगरबम एक छात्र सम्मेलन किया और इस सम्मेलन में 1 से 2 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन करने का निश्चित किया । सितम्बर 1994 को जब प्रदर्शनकारी दिल्ली जा रहे थे तो मुज़फ्फरनगर जिला स्थित रायपुर तिराहे पे पुलिस ने उनपर क्रूरतापूर्ण ढंग से हमला कर दिया जिसमे महिला प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने बहुत दुराचार किया और इस घटना में 8 लोगों की मौत की पुष्टि हुई ।
◆श्रीयंत्र टापू घटना :- रायपुर तिराहे घटना के विरोध में पूरे प्रदेश में हिंसक प्रदर्शन हुए जिसमे कई जगहों पर कर्फ्यू भी लगया गया । इनके बाद 10 नवम्बर 1995 में श्रीनगर स्थित श्रीयंत्र टापू पर आमरण अनसन पर बैठे आंदोलकारियों पे पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया जिसमे यशोधर बेंजवाल व राजेश रावत की मौत हो गयी ।
® इन सभी आंदोलनों के बाद 15 अगस्त 1996 को तत्कालीन प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने उत्तराँचल राज्य के निर्माण की घोषणा कर दी । इसके बाद उत्तरांचल राज्य सम्बंधित विधेयक उत्तर प्रदेश विधानसभा में पारित हुआ । 27 जुलाई 2000 को उत्तर प्रदेश पुनर्गठन विधेयक 2000 के नाम से विधानसभा में प्रस्तुत हुआ । 1 अगस्त 2000 को लोकसभा तथा 10 अगस्त 2000 को राज्यसभा में पारित हुआ ।
★ 28 अगस्त 2000 को राष्ट्रपति के.आर.नारायण ने इस विधेयक को मंजूरी देदी और 9 नवम्बर 2000 को देश का 27वां राज्य उत्तराँचल जिसकी अस्थायी राजधानी देहरादून है अस्तित्व में आया । जनभावनाओं के आधार पर 1 जनवरी 2017 को इस राज्य का नाम उत्तरांचल से उत्तराखंड कर दिया गया था ।

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