INDIAN HISTORY-भारत इतिहास





भारत इतिहास पर एक नजर । यह जानकारी विस्तृत नही है इसमें केवल कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों पर प्रकाश डाला गया है । तथा कम समय मे अधिक परिक्षपयोगी बातों को लिखा गया है ।

हड़प्पा सभ्यता ( सिन्धुघाटी सभ्यता) -2350 ई पूर्व से 1500 ई पू.:-
इसका नाम सिन्धुसभ्यता इस लिए है क्योंकि उस वक्त के सारे शहर सिन्धु नदी के किनारे पर स्थित थे । तथा पहला खोजा गया शहर "हड़प्पा" था इसलिए इसको हड़प्पा सभ्यता भी कहा जाने लगा । 
इस काल में जीवन शहरी था, धार्मिक कट्टरता नही थी, जातिवाद नही था , साम्प्रदायिकता नही थी । 
अर्थव्यवस्था :- अर्थव्यवस्था दो तरह की होती थी , अधिशेष (surplus) अर्थव्यवस्था तथा जीने योग्य ( subsistence)  अर्थव्यवस्था । हड़प्पा सभ्यता में अर्थव्यवस्था surplus थी ,जिसका मतलब है भण्डार का भरा होना । 

ऋग्वैदिक काल ( 1500 ई पू से 1000 ई पू ) :-
इस काल के लोगों का व्यवसाय पशुपालन था ,अतैव अस्थाई जीवनशैली थी । समाज कबीलों में बंटा हुआ था लेकिन कर्मकांड नही था और केवल उन देवताओं को माना जाता था जिनका कोई भौतिक स्वरूप था जैसे सूर्य , आग , जल इत्यादि ।
इस काल में वर्ण व्यवथा कर्म के अनुसार थी और पूरा समाज चार वर्णो में बंटा हुआ था- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व सूद्र । अतैव जिसका कार्य जैसा था उसको उस वर्ण में रख दिया जाता था जैसे पढ़ाने वाले को ब्राह्मण वर्ण रख दिया , ताकत के कार्य करने वाले को क्षत्रिय में । इस काल में राजा वंशानुगत नही होते थे बल्की कबीलों द्वारा चुने जाते थे या जनता द्वारा चुने जाते थे । इस काल को स्त्रियों के लिए बहुत अच्छा काल भी कहा जा सकता है । क्योंकि इस काल में विदवा विवाह की अनुमति थी, स्त्री की पढ़ाई व शादी को लेकर उसकी स्वतंत्रता थी ।

उत्तरवैदिक काल ( 1000 ई पू से 600 ई पू ):-
इस काल का मुख्य व्यवसाय कृषि था तथा इस काल में लोहे का प्रयोग भी शुरू हो गया था  लेकिन जीवनशैली स्थाई थी । इस काल में जनपद और महाजनपद बनने लगे थे और सम्पूर्ण भारत  16 महाजनपदों में बंट गया था । इस काल से कर्मकांड शुरू हुआ और सीमित देवी देवता असीमित हो गये । इसी काल में यज्ञ, हवन, ज्ञान, ध्यान व रूढ़िवादी परम्पराए शुरू हुई । यहीं से वर्ण व्यवस्था वंशानुगत हो गई और राजा भी वंशानुगत होने लगे अर्थात राजा का बेटा/बेटी ही अगला उत्तराधिकारी होगा । राजा की वंशानुगत नीति के कारण युद्ध नीतियां बनी तथा साम्राज्य का विस्तार होने लगा । इस काल में स्त्रियों के स्वतंत्र विवाह व शिक्षा क साथ साथ विदवा विवाह पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया ।
★ इसी काल में जैन व बौद्ध दो क्षत्रिय मत आये । यह शुरू में धर्म नही थे किन्तु वक्त के साथ साथ यह धर्म रूप में परिवर्तित हो गए । गौतम बुद्ध अपने सिद्धान्त में इतने लीन हो गए कि फिर न उन पर फूल का असर हुआ और न ही सूल का असर हुआ । 

600 ई पू से 100 ई पू तक का समय :- 
16 महाजनपद:-
सबसे पहला वंशा हुआ "हर्यक वंश" फिर हुआ "शिशुनाग वंश" फिर हुआ " नन्द वंश" फिर हुआ " मौर्य वंश" फिर हुआ "ब्रह्दत"(185 ई पू) मौर्य वंश का अंतिम शासक उसके बाद "गुप्तकाल" इत्यादि । इन सब में सबसे रोचक इतिहास मौर्य वंश का अतैव हम उसी को पढ़ेंगे । 
मौर्य वंश के पहले राजा हुए चन्द्रगुप्त मौर्य , इनके वक्त में जैन धर्म का प्रचार प्रसार हुआ तथा चन्द्रगुप्त जैन धर्म को ही मानते थे । फिर आए उनके पुत्र बिंदुसार (298 - 73) , ये जैन धर्म को नही मानते थे तथा इनके बाद आए इनके पुत्र अशोक । अशोक पिता की मृत्यु के चार साल बाद 269 में अपने भाइयों को पराजित कर गद्दी पर बैठे और राजा बने । राजा बनने के 8 साल बाद 261 ई पू में अशोक ने कलिंग पर आक्रमण कर दिया । इस युद्ध मे अशोक ने भीषण नर सहार किया । इसी समय एक चीनी यात्री उदगुप्त बौद्ध धर्म को जनने के लिए भारत आया तथा गलती से कलिंग पहुंच गया । उसने वहां देखा कि चारों तरफ लासे ही लासे व मांस के टुकड़े और खून ही खून से पूरा मैदान कीचड़ कीचड़ हो रखा है । इसी दौरान उदगुप्त ने अशोक से पूछा कि हे महाराज! क्या आपका केवल यही उद्देश्य है इस जीवन में ? इतिहासकार लिखते हैं कि उस वक्त से अशोक का हृदय परिवर्तन हुआ और उन्होंने तलवार फेंक दी और बौद्ध धर्म की शरण में आ गए । 259 ई पू अशोक ने अपनी बेटी सुमित्रा व पुत्र महेंद्र को श्रीलंका भेजा की वहां जाकर बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार करो । अशोक के शासन काल में ही बौद्ध धर्म अंतर्राष्ट्रीय धर्म बना क्योंकि उन्होंने दूसरे देशों में उसका प्रचार प्रसार किया ।
★ 16 महाजनपदों में सबसे शक्तिशाली जनपद था मगध और उसके शक्तिशाली होने की दो मुख्य वजह थी । अगर आप विश्व मानचित्र पर प्राचीन भारत को देखोगे तो यह उत्तर से हिमालय , पूर्व से बंगाल की खाड़ी , दक्षिण से हिंदमहासागर व पश्चिम से अरब महासागर से घिरा हुआ था  तथा इस काल तक पानी के जहाजों का अविष्कार नही हुआ था और भारत 3 जगह से पानी से घिरा हुआ था तो यहां आने का सिर्फ एक रास्ता था वह था हिमालय का दर्रा " खेबरपास" अतैव इस पर आक्रमण करना इतना आसान नही था । दूसरी वजह थी कि मगध गंगा और यमुना के बीच था तो भूमि अधिक उपजाऊ थी ।

मध्यकालीन भारत :-
711ई. में भारत पर पहला मुस्लिम आक्रमण हुआ था । अरब के राजा मनसूर हजाज ने अब्दुल्ला और बुन्देला नामक दो व्यक्तियों को भारत पर आक्रमण के लिए भेजा परन्तु वह सफल न हो सके । 712 ई. में सिंध क्षेत्र के राजा थे राजा दाहीर इन पर मोहम्मद बिन कासिर ने आक्रमण किया और सफलता हासिल की , इसको भी मनसूर हजाज ने ही भेजा था । मोहम्मद गजनी ने भारत पर 11 बार आक्रमण किया जिसमें 1024 ई बा सोमनाथ युद्ध प्रसिद्ध है ।
1191 में मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज पर आक्रमण(तराइम का युद्ध) किया किंतु वह हार गया था । इतिहासकार लिखते हैं कि मोहम्मद गौरी एक साल तक इसी आग में जलता रहा और 1192 में उसने पुनः पृथ्वीराज पर आक्रमण किया और  पृथ्वीराज को हरा के मुस्लिम साम्राज्य की नीव रखी । भारत का ही एक राजा था जयचंद्र जिसने मोहम्मद गौरी को भारत पर आक्रमण के लिए आमंत्रित किया था, बाद में 1194 में गौरी ने उसको भी खत्म कर दिया ।

दिल्ली सल्तनतकाल( 1206 से 1526 ई):-

1- गुलाम वंश ( 1206 - 1290) - वह राजा जो महोम्मद गौरी के गुलाम रहे इसलिए इसको गुलाम वंश नाम दिया गया के पहले राजा थे कुतबुद्दीन ऐबक फिर 1211 में आया इल्तुतमिश, इल्तुतमिश ने चांदी का सिक्का टँका व ताँबा का जीतल चलाया था ।
2- खिलजी वंश (1290-1320) - इस वंश का पहला राजा था जलालुद्दीन तथा इसके बाद हुआ जलालुद्दीन का भतीजा अलाउद्दीन । अलाउद्दीन के नेतृत्व में जलालुद्दीन ने पहली बार दक्षिण भारत पर 1293 ई में आक्रमण किया था और दक्षिण भारत को लूट लिया था । 1303-04 ई में अलाउद्दीन का दिल चितौड़ की रानी पद्मावती पर आ गया था और उसने चितौड़ पर आक्रमण कर दिया किन्तु सफलता नही मिली ।
3- तुगलक वंश(1320 ई से 1414 ई) :- पहला राजा हुआ गयासुद्दीन तुगलक फिर  हुआ मोहम्मद बिन तुगलक इसने दोआब क्षेत्र में करवृद्धि ,सांकेतिक मुद्रा का चलन तथा खुरासन व कराचिल का अभियान चलाया । बाद में फिरोज शाह तुगलक व अन्य राजा भी हुए ।

4- सयदवंश (1414- 1451) :- पहला राजा खिज्र खां फिर पुत्र मुबारक खां जिसने शाह की उपाधि धारण की । अंतिम राजा था अलाउद्दीन आलम शाह ।

5- लोदीवंश ( 1451 ई - 1526 ई) :- पहला राजा बहलोल लोदी, फिर इसका पुत्र निजाम खां जिसको 1489 ई में सुल्तान सिकन्दर शाह की उपाधि के साथ दिल्ली के सिहांसन पर बिठाया गया।  इसी ने आगरा शहर की स्थापना की थी । इसके बाद 1517 में इसका बेटा इब्राहिम लोदी गद्दी पर बैठा और 21 अप्रैल 1526 को बाबर के साथ पानीपत की लड़ाई में इब्राहिम लोदी के साथ अफगानी वंश का अंत हुआ और बाबर का तुर्क( मुगल) वंश की शुरुवात हुई । 
★ इसी बीच 1498 में वास्कोडिगामा भारत आया । मतलब अब भारत समुद्र के रास्ते भी आया जा सकता था क्योंकि पानी के जहाज की खोज हो चुकी थी ।

मुगल वंश( 1526 ई से 1707ई ):-
इस वंश का पहला राजा हुआ बाबर , 1507 में बादशाह की उपाधि धारण की । बाबर के पास सेना कम थी किंतु उसकी तोपों के आगे लाखों सैनिक भी हार जाते थे और वही उसकी ताकत भी थी । 1527 का खानवा का युद्ध उसने अपनी शक्ति क विस्तार व राजपूतों को हराने के लिए लड़ने का निर्णय लिया लेकिन उस वक्त का राजपूत राजा रानासंघा को देखकर बाबर की सेना ने युद्ध लड़ने से मना कर दिया । इसकी एक वजह यह भी थी की बाबर लगतार बिना आराम दिए सेना को लड़ाता आ रहा था । बाबर बहुत तेज खोपड़ी व चतुर प्रवृति का राजा था उसने सोचा की सेना का मनोबल कैसे बढाया जाय तो उसने अपनी सेना से कहा की सभी गैर स्लामिक राज्यों को स्लामिक राज्यों में बदल दो और अगर तुम सफल हुए तो तुम्हें इनाम दिया जाएगा । सेना पुनः जोश में आ गयी और युद्ध में राणासांघा हार गया । 1528 में चन्देरी का युद्ध मेदनीराय को हराया । 1529 में घाघरा का युद्व अफगानों को हराया । 1530 ई में बाबर का बेटा हुमायूं किसी किसी भीषण बीमारी से ग्रसित हो गया , इतिहासकार लिखते हैं कि उसके लिए बाबर ने ईश्वर से प्रार्थना की, कि इसकी बीमारी मुझे दे दो और बताया जाता है कि उनकी पुकार सुन ली गयी और बाबर उसी बीमारी से मर गया । 
1540 में शेरशाह सूरी जो की बाबर की सेना का ही एक आदमी था और 1526 के युद्ध में बाबर की मदद की थी ,ने सल्तनत पर हमला बोल दिया और हुमायूं वहाँ से अपनी पत्नी संग भाग खड़ा हुआ । और शेरशाह ने दोबारा अफगानी वंश को शासन में खड़ा कर दिया । यहाँ एक महत्वपूर्ण बात यह है कि शेरशाह सूरी यह युद्ध जीत कैसे गया जबकि बाबर के पास पहले से ही तोप थे ? शेरशाह सूरी यह बात अच्छे से जनता था कि अगर तोप चली तो वह युद्ध नही जीत पायेगा अतैव उसने बरसात के दिनों को युद्ध के लिए चुना जब बारूद सीलन से निष्क्रिय था । बाबर बहुत तेज दिमाग था किंतु शेरशाह सूरी उससे भी एक कदम आगे निकल गया । 
★ शेरशाह सूरी ने भारत में ग्रांडट्रंक रोड की स्थापना की तथा अकबर का अग्रगामी भी कहा जाता है शेरशाह सूरी को , क्योंकि अकबर को इसका ही बसबसाय साम्राज्य मिला था तभी अकबर आपने साम्राज्य को इतना बढ़ा पाया । शेरशाह सूरी ने ही जमीन पट्टेदारी प्रथा शुरू की थी ।
1545 में शेरशाह सूरी की मृत्यु हो गयी और सूर्योंवंश का शासन हो गया लेकिन शेरशाह की मृत्यु की खबर सुनकर 1555 में हुमायूं दोबारा यहाँ आया और उसने आक्रमण कर दिया तथा उसकी विजय हो गया किंतु अकबर व पत्नी को वह यहाँ नही लाया था । एक दिन वह पुस्तकालय में किताब पढ़ रहा था और अचानक सीढ़ियों से गिरने से उसकी मौत हो गयी । अकबर तक खबर गयी तो उसको आने में साल लग जाते क्योंकि वह बहुत दूर था यह मौका देखकर हेमुविक्रमदित्य ने दिल्ली पर आक्रमण कर दिया और दिल्ली की गद्दी पर बैठ गया, हेमुविक्रमदित्य एक मात्र हिन्दू राजा है जिसने माध्यकालीन भारत में राज किया है । 1556 में 14 वर्षीय अकबर वापस आया और उसने बैरंम खान के नेतृत्व में हेमुविक्रमदित्य से पानीपत के मैदान में युद्ध लड़ा और विजय प्राप्त की । उसके बाद 1556 से 1605 तक लगभग 50 साल उसने दिल्ली पर शासन किया । सोने की मुद्रा चलाई , इसी की सबसे बड़ी मुद्रा शहंशाह थी । 
इसके बाद जहांगीर ( 1606- 1627) आया ,इसी काल में अंग्रेज भी भारत आ गये थे तथा 1612 ई में अंग्रेजो ने पुर्तगालों के खिलाफ युद्ध लड़ा था। फिर शाहजहां (1627- 1657) आयी ,फिर औरंगजेब (1658-1707) आया ।

आधुनकि भारत :- 1498 में वास्कोडिगामा के भारत आने के बात बाकी देशों के लिए समुद्री रास्ते भारत में आना आसान हो गया । इससे पहले केवल एक ही मार्ग था और वह हिमालयी दर्रा खेबरपास था । अब आधुनिक काल को मैं आपको 13 स्टेप में समझता हूँ -

1- विदेशी शक्तियों का आगमन :- 1498 वास्कोडिगामा, 1505 फ्रांसिस्को द अल्मेडा भारत में पहला वायसराय बनकर आया । 1510 ई में यूसुफ आदिल शाह ने गोवा को जीता इत्यादि।
2- संघर्ष काल:- डचों का भारत में अंतिम रूप से पतन 1759 ई को अंग्रेज एवं डचों क मध्य हुए वेदरा युद्ध से हुआ । 1749- 54 ई कर्नाटक युद्ध में फ्रांसीसी गवर्नर डूप्ले की हार हुई । पंडुचेरी की सन्धि(1755) के साथ युद्धविराम हुआ ।
3- ईष्ट इंडिया कंपनी:- 31 दिसंबर 1600 ई को इंग्लैंड की रानी एलिजाबेथ प्रथम ने कंपनी को अधिकार पत्र प्रदान किया । 
4- शोषणकारी नीतियां :- कर व लगान वशूल करना ।
5- 1857 की क्रांति :- बहादुरशाह जफर के नेतृत्व में
6- सम्मान और धर्म सुधार आंदोलन :- स्वराज पार्टी ,मुस्लिम लीग इत्यादि का गठन ।
7- कांग्रेस- 8 प्रान्तों में जीत 1937 ई.
8- नरमपंथी व गर्मपंथी
9- क्रांतिकारी
10- गांधी युग
11- स्वतंत्रता





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